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ruma
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भारतीय धर्मग्रंथों के अनुसार मनुष्य पर तीन प्रकार के ऋण प्रमुख माने गए हैं- पितृ ऋण, देव ऋण तथा ऋषि ऋण। इनमें पितृ ऋण सर्वोपरि है। पितृ ऋण में पिता के अतिरिक्त माता तथा वे सब बुजुर्ग भी सम्मिलित हैं,ब्रह्मचार्य के द्वारा ऋषिऋण से, यज्ञ द्वारा देवऋण से और सन्तति को सुयोग्य बनाने से पितृऋण से छुटकारा मिलता है
12 June, 2009 07:02 PM
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Guest
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भारतीय धर्मग्रंथों के अनुसार मनुष्य पर तीन प्रकार के ऋण प्रमुख माने गए हैं- पितृ ऋण, देव ऋण तथा ऋषि ऋण। इनमें पितृ ऋण सर्वोपरि है। पितृ ऋण में पिता के अतिरिक्त माता तथा वे सब बुजुर्ग भी सम्मिलित हैं,ब्रह्मचार्य के द्वारा ऋषिऋण से, यज्ञ द्वारा देवऋण से और सन्तति को सुयोग्य बनाने से पितृऋण से छुटकारा मिलता है
12 June, 2009 06:56 PM
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Guest
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1- मात्र ऋण् 2-पित्र ऋण 3- दैव ऋण
12 June, 2009 05:44 AM
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bindu jain
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मातृ,पितृ और गुरु ऋण, गुरू ऋण गुर दक्षिणा से, पितृ ऋण पुत्र प्राप्ति पर और मातृ ऋण की मुक्ति का कोई मार्ग नही है ।
11 June, 2009 06:46 AM
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