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प्रश्न

javed shah-khajrana
फिल्मों के शुरुआती दौर में फिल्मों को बुरा माना जाता था इसिलिये भारत कि पहली फ़िल्म "राजा हरीशचंद्र " में काम करने के लिए वेश्याओं तक ने मना कर दिया था ,तो मजबुरन सालुंके को हीरो-हीरोइन का रोल करना पड़ा /भारत में सिनेमा के जनक दादा साहब फाल्के अपने जीवन में अंधे हो गए थे इस्लाम मजहब और हमारी भारतीय संस्कृति दोनों में फ़िल्म वर्जित है ????? आप क्या मानते है ???


03 November, 2009 01:28 PM
उपयोगकर्ताओं के उत्तर
उत्तर: 3
RAMZAN ALI "भारत में सिनेमा के जनक दादा साहब फाल्के अपने जीवन में अंधे हो गए थे-"-----जैसी करनी वैसी भरनी.......सिर्फ़ अंधे ही नही हुए थे उनके घर के बर्तन तक बिक गए थे...


04 November, 2009 08:45 PM
bindu jain ग़लत क्या है | क्या आप जिसे मानते है वही सही है ? यदि हा तो क्या फर्क है आप में और उनमें |


03 November, 2009 09:00 PM
Satish Tripathi नाटक नौटंकी का परिष्कृत रुप ही फ़िल्म है भारतीय संस्कृति में फ़िल्म वर्जित न्ही है ये सही है कि फिल्मों कि शुरुआत में प्रतिष्ठित घर के लोग खास कर स्त्रिया फिल्मों में कम न्ही किया करती थी इसका जो कारण माना गया था वो सही है और आज भी सही है लेकिन आजकल जो फिल्मों में काम करती है वो ही समाज के लिए मिसाल मानी जाती है


03 November, 2009 04:18 PM
 
हॉल ऑफ़ दि फ़ेम
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