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narasimha dikshit
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वेदों में कहा है कि ईश्वर प्रथम अकेले थे. एकोहम बहुस्याम कहकर अनेक रूप धारण किए. तत्वमसि यानि वह में ही हूँ. मैं उनका ही एक रूप हूँ इसका तप द्वारा अनुभव करना ही तत्वज्ञान है.
06 November, 2009 08:39 PM
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bindu jain
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समभाव ही तत्व ज्ञान है.
06 November, 2009 08:22 PM
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Guest
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इस संसार से दूर आत्मा' इश्वर,संसार की जान्आने की इक्शा करना तत्व ज्ञान है.
06 November, 2009 09:38 AM
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