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javed shah-khajrana
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बुत यानी पत्थर परस्ती यानी पुज़ा / पत्थर कि पूजा को बुत परस्ती कहते है / खुदा ने इस धरती पे 1800 चिजे पैदा कि जैसे सूरज-चाँद,नदी-सागर,पशु-पक्षी,पैड-पौधे,रेत-पहाड़ ,देव-प्रेत इत्यादि लेकिन इसमें मनुष्य को सबसे श्रेष्ठ बनाया और दुनिया कि इन सभी चीजों को उसके फायदे के लिए / हम इन्सान चाहे तो आसमन में उड़े(हवाई जहाज)हम चाहे तो नदी का सीना चीरकर उसमें नहर बना दे(बाँध)हम चाहे तो जानवरो को अपना ग़ुलाम बना ले चाहे वो शेर/हाथी हो(सर्कस)पैड-पौधो को काटकर मकान(फर्नीचर)प्रेतों को अपने वश में कर ले ?
06 November, 2009 04:48 PM
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Guest
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(अपरिचित) तो हम पूजा किसी कि भी करे बस हमारी भावना सही होनी चाहिये और अपनी आत्मा की आवाज़ सुननी चाहिये. जितनी भी प्रकार कि मुर्तिया है वो किसी ना किसी प्रकार का अर्थ अपने साथ लिए हुए है तो वो तो बस ज्ञान के दरवाजे है जो हमें परम सत्य के दर्शन करवा सकते है. हाँ यदि आप चाहे तो हर कण में ईश्वर के होने की बात को भी मै तार्किक रूप से प्रमाणित कर सकता हूँ. बस इतना समझो कि "मानो तो भगवान ना मानो तो पाषाण." (अपरिचित)
05 November, 2009 11:49 PM
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Aparichit Anunad
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बुत परस्ती यानी मूर्ति पूजा.
काफ़ी लोग इसे ग़लत मानते है. पर ये शुरू कहाँ से हुई. भक्त प्र्ह्लाद से, जिन्होंने दिखाया की एक निर्जीव खंभे में भी भगवान हो सकते है. हान अगर कोई चाहे तो इस घटना की प्रामाणिकता पर प्रश्न उठा सकता है. तो इसका भी उत्तर है मेरे पास. जब भी हम किसी ईश्वर की मूर्ति या तसवीर के पास जाते है तो थोड़ी देर में ही आँखें बंद हो जाती है अर्थात वो तो तो बस अनंत कि ओर बढ़ने में हमारी मदद करता है अंतरमन से हम उसे निराकर ही मानते है. और दुनिया के हर कण में ईश्वर का वास है.
05 November, 2009 11:38 PM
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