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प्रश्न

भुजंग
"सर्वे भवंतु सुखिन: सर्वे संतु निरामया:" और "वसुधैव कुटुम्बकम" जैसे सर्वोच्च आदर्श हिंदू दर्शन ने ही विश्व को दिए. लेकिन विडंबना देखिए कि वो ही हिंदू धर्म इतिहास में सबसे दमित और दलित हुआ !! क्या दूसरे धर्मों ने इस भावना को उसकी कमजोरी समझा ?


07 November, 2009 10:46 AM
उपयोगकर्ताओं के उत्तर
उत्तर: 4
dkaushik.2007@rediffmail.com भाई, 1 बात सुन. या तो दुनिया की रीत है. जो कोई गलती करेगा, उसका खामियाजा तो भुगतना ही पड़ेगा. हिंदू कमजोर ना था, ना है, पर हमने अपने को कमजोर कर लिया. हम बँट गये हैं, सब बोलेगे कि में ईसाई हूँ, में मुस्लिम हूँ, पर हिंदु बोलेगा कि में जाट - में ब्राह्मण - में बाणिया - में ये में वो....... आगे आप ख़ुद समझ जा यार.


08 November, 2009 10:00 AM
bindu jain धर्म का मतलव हम नही समझे , धर्म के नाम पर सबको अपने यहा बसाते चले गए और एक दिन घर पर ऊँट के कब्जा कर लिया और घर बालों को बाहर होना पड़ा |


07 November, 2009 08:23 PM
Guest कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौरे-जहां हमारा


07 November, 2009 12:51 PM
Manikant Vishwakarma किसी भी धर्म को दमन करने के लिए उसी के संस्कृति और सभ्यता को चोट पहुँचाया जाता है आज के समय में हिंदू धर्म के साथ भी कुछ ऐसा ही हो रहा है फिर भी कोई हिंदू इस बात को नही समझना चाहता क्योकि उसे खाने को मालपुवे मिल रहे है और देखने वाली बात ये है जो खिला रहे है वही उसे मिटाना चाहते है --हो सकता है मेरी बात किसी को बुरि लगे -- इसके लिए मुझे माफ करे


07 November, 2009 10:55 AM
 
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